एसजीआरआर विश्वविद्यालय बना वैश्विक शोध सहयोग का केंद्र, क्यूएस टॉप-50 विवि से करार

एसजीआरआर विश्वविद्यालय बना वैश्विक शोध सहयोग का केंद्र, क्यूएस टॉप-50 विवि से करार

देहरादून। श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय (एसजीआरआरयू), देहरादून ने वैश्विक अनुसंधान के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि दर्ज करते हुए अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धी अनुसंधान अनुदान कार्यशाला का सफल आयोजन किया। विश्वविद्यालय के रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेल द्वारा आयोजित इस अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्देश्य संकाय सदस्यों और शोधकर्ताओं को वैश्विक अनुसंधान अनुदान प्राप्त करने की प्रक्रिया, रणनीति और व्यावहारिक पहलुओं से अवगत कराना रहा।
शनिवार को विश्वविद्यालय के ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यशाला का शुभारंभ कुलपति डॉ. प्रतापन के. पिल्लई, कुलसचिव डॉ. लोकेश गम्भीर और आयोजन सचिव डॉ. अशोक भण्डारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर किया। कुलपति डॉ. पिल्लई ने कहा कि उच्च गुणवत्ता वाला अनुसंधान और नवाचार ही विश्वविद्यालयों की वैश्विक पहचान तय करते हैं। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय सहयोग, अंतर्विषयक अनुसंधान और वैश्विक मानकों के अनुरूप शोध को एसजीआरआर विश्वविद्यालय की प्राथमिकता बताया।
कार्यशाला में जापान के प्रतिष्ठित हिरोशिमा विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. वी. जी. पराले और भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के अंतर्राष्ट्रीय वैज्ञानिक सहयोग के पूर्व सलाहकार एवं प्रमुख डॉ. एस. के. वार्ष्णेय ने विशेषज्ञ वक्ता के रूप में सहभागिता की। डॉ. पराले ने वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्किंग, अंतर्विषयक शोध और उच्च प्रभाव वाली पत्रिकाओं में प्रकाशन के महत्व को रेखांकित किया। वहीं डॉ. वार्ष्णेय ने शोध प्रस्ताव लेखन की बारीकियों, अनुदान अस्वीकृति के कारणों और वित्तपोषण एजेंसियों की अपेक्षाओं पर विस्तृत जानकारी दी।
कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण दक्षिण कोरिया के विश्वप्रसिद्ध योन्सेई विश्वविद्यालय (क्यूएस रैंकिंग-50) के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर रहा। इस एमओयू से संयुक्त शोध परियोजनाओं, संकाय व छात्र विनिमय, सहयोगात्मक प्रकाशन और नवाचार आधारित गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है। विभिन्न संकायों के शोधकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी के साथ यह आयोजन एसजीआरआर विश्वविद्यालय को वैश्विक अनुसंधान मानचित्र पर और सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

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