स्वामी श्रद्धानंद की तपस्थली: राष्ट्र निर्माण की प्रयोगशाला

स्वामी श्रद्धानंद की तपस्थली: राष्ट्र निर्माण की प्रयोगशाला

हरिद्वार डेस्क/गुरुकुल कांगड़ी सम विश्वविद्यालय में चल रहे शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के नौ दिवसीय सांकेतिक धरने को मंगलवार को उस समय नया बल मिला जब हरिद्वार स्थित मातृ सदन के संतों ने इस आंदोलन को अपना पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की। आंदोलनरत कर्मचारियों की मुख्य मांग कुलसचिव पद पर काबिज सुनील कुमार को हटाने और विश्वविद्यालय को आर्य समाज के केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने की है।

धरने के संयोजक डॉ. शत्रुघ्न झा ने बताया कि आंदोलन विगत नौ दिनों से लगातार जारी है और यह तब तक चलेगा जब तक मांगे पूरी नहीं होतीं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुलसचिव का पदधारण अवैध रूप से किया गया है और विश्वविद्यालय की आत्मा—जो आर्य समाज के सिद्धांतों पर आधारित है—उसे कमजोर किया जा रहा है।

इस अवसर पर मातृ सदन के ब्रह्मचारी सुधानंद ने कहा कि गुरुकुल कांगड़ी एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर है, जिसकी स्थापना स्वामी श्रद्धानंद ने वर्ष 1902 में की थी।> “यह संस्थान केवल शिक्षा का केंद्र नहीं बल्कि राष्ट्रनिर्माण का विचारकेंद्र है। यदि यहां अनैतिक शक्तियों का हस्तक्षेप हुआ तो देश की संस्कृति को गहरा आघात पहुंचेगा,” – सुधानंद।

 

ब्रह्मचारी दयानंद ने स्पष्ट किया कि मातृ सदन केवल उन्हीं आंदोलनों का समर्थन करता है जो सत्य, सिद्धांत और धर्म पर आधारित होते हैं।

 “यह केवल कर्मचारियों का आंदोलन नहीं है, बल्कि यह आदर्शों की रक्षा की लड़ाई है,” उन्होंने कहा।

 

संघ के अध्यक्ष रजनीश भारद्वाज ने कहा कि सभी कर्मचारी पूरी निष्ठा और एकता के साथ आंदोलन से जुड़े हैं।

“हम किसी भी राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। यह संघर्ष विश्वविद्यालय को केंद्रीय आर्य समाज संस्थान का दर्जा दिलाने तक जारी रहेगा।”

 

धरने में बोलते हुए डॉ. सचिन पाठक ने कहा कि वर्तमान में विश्वविद्यालय में दो कुलपति और दो कुलसचिव होने से एक असहज स्थिति उत्पन्न हो गई है।

 “यह प्रवेश प्रक्रिया के समय छात्रों और अभिभावकों में भ्रम की स्थिति पैदा कर रहा है,” उन्होंने चिंता जताई।

 

प्रकाश तिवारी ने भावुक स्वर में कहा कि यदि विश्वविद्यालय पर कोई संकट आता है, तो वह और उनके जैसे सैकड़ों कर्मचारी अपना सर्वस्व न्योछावर करने को तैयार हैं।

डॉ. धर्मेंद्र बालियान ने मातृ सदन के समर्थन को आंदोलन के लिए “टर्निंग पॉइंट” बताया और विश्वास जताया कि अब यह संघर्ष निर्णायक परिणाम तक पहुंचेगा।

महामंत्री नरेंद्र मलिक ने जानकारी दी कि आंदोलन से संबंधित सभी दस्तावेज मातृ सदन को सौंप दिए गए हैं, और संस्था ने इस आंदोलन को पूरी तरह अपनाने की घोषणा की है।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. पंकज कौशिक ने किया।

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