गुरुकुल कांगड़ी की ऐतिहासिक परंपरा से जुड़ा वसंत पंचमी पर्व, विद्यार्थियों ने दिखाई रचनात्मकता
हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी सम विश्वविद्यालय में वसंत पंचमी का पावन पर्व श्रद्धा, उल्लास और सांस्कृतिक भव्यता के साथ मनाया गया। विश्वविद्यालय परिसर पूरे दिन मां सरस्वती की आराधना, वैदिक मंत्रोच्चार और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से गूंजता रहा। इस अवसर ने न केवल ज्ञान की आराधना का संदेश दिया, बल्कि गुरुकुल कांगड़ी की गौरवशाली परंपरा को भी जीवंत कर दिया।
समारोह का शुभारंभ कार्यवाह कुलपति प्रो. प्रभात कुमार ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया। उन्होंने कहा कि गुरुकुल कांगड़ी सम विश्वविद्यालय की स्थापना वसंत पंचमी के शुभ अवसर पर पुण्यभूमि कांगड़ी में हुई थी, जो इस पर्व को विश्वविद्यालय के लिए ऐतिहासिक और आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है। उन्होंने वसंत पंचमी को ज्ञान, नवचेतना और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का पर्व बताया।
उत्सव के दौरान शिक्षक, कर्मचारी एवं छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़कर सहभागिता निभाई। विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों, सरस्वती वंदना और रंगोली प्रतियोगिता ने पूरे परिसर को रंगों और रचनात्मकता से भर दिया।
वेद विभाग के प्रो. दिनेश चंद्र शास्त्री ने कहा कि ऋग्वेद में वसंत पंचमी का उल्लेख अनेक मंत्रों में मिलता है और मां सरस्वती को बुद्धि, विवेक एवं ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। उन्होंने विद्यार्थियों को वैदिक मूल्यों से जुड़कर जीवन को दिशा देने का संदेश दिया।
कल्चर अफेयर्स डीन डॉ. मुदिता अग्निहोत्री ने बताया कि कन्या गुरुकुल परिसर, हरिद्वार की छात्राओं द्वारा प्रस्तुत गीत-नृत्य ने समारोह की गरिमा को और ऊंचाइयों तक पहुंचाया। रंगोली प्रतियोगिता में बी-टेक विभाग की छात्रा को प्रथम, जबकि अंग्रेजी विभाग की छात्राओं को द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्रदान किए गए।
कार्यक्रम के समापन पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. नवनीत ने सभी को वसंत पंचमी की शुभकामनाएं देते हुए आयोजन से जुड़े सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. निशा शर्मा ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के समस्त शिक्षक, शिक्षिकाएं, शिक्षकेत्तर कर्मचारी एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

