जटिल सर्जरी में हिम्स जौलीग्रांट की बड़ी उपलब्धि, प्रजनन क्षमता सुरक्षित रखते हुए निकाले आठ सिस्ट
देहरादून/डोईवाला। चिकित्सा विज्ञान में तकनीक और विशेषज्ञता का उद्देश्य महज बीमारी का उपचार करना नहीं, बल्कि मरीज के भविष्य को भी सुरक्षित रखना है। इसी सोच को चरितार्थ करते हुए हिम्स जौलीग्रांट ने जटिल स्त्री रोग सर्जरी के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि दर्ज की है। हरियाणा के करनाल निवासी 29 वर्षीय अविवाहित युवती की दोनों ओवरी में मौजूद कुल आठ डर्मॉइड सिस्ट को अत्याधुनिक लैप्रोस्कोपिक तकनीक के माध्यम से सफलतापूर्वक निकाल लिया गया। मरीज की बाईं ओवरी में पांच, जबकि दाईं ओवरी में तीन सिस्ट मौजूद थे। संस्थान के अनुसार, उत्तराखंड में दोनों ओवरी से एक साथ इतनी संख्या में डर्मॉइड सिस्ट को लैप्रोस्कोपिक तकनीक से निकालने का यह पहला दर्ज मामला है।
सर्जरी की जटिलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चिकित्सकीय टीम के सामने आठ सिस्ट को सुरक्षित तरीके से निकालने के साथ-साथ स्वस्थ ओवेरियन टिश्यू को अधिकतम संरक्षित रखने की चुनौती थी। स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की डॉ. प्रज्ञा खुग्साल के नेतृत्व में की गई सर्जरी में विशेष एंडोबैग का उपयोग करते हुए सभी सिस्ट को बिना फटे और बिना किसी रिसाव के बाहर निकाला गया। मरीज की कम उम्र और भविष्य में मातृत्व की संभावनाओं को देखते हुए ओवरी के स्वस्थ हिस्से को संरक्षित रखने पर विशेष जोर दिया गया तथा सिस्ट निकालने के बाद आवश्यक ओवेरियन पुनर्निर्माण भी किया गया।
डॉ. प्रज्ञा खुग्साल के अनुसार, ऐसे मामलों में सफलता का पैमाना केवल सिस्ट को निकाल देना नहीं, बल्कि उपचार के साथ मरीज की भविष्य की प्रजनन क्षमता को सुरक्षित रखना भी है। यही कारण रहा कि पूरी प्रक्रिया अत्यंत सूक्ष्मता और सावधानी के साथ संपन्न की गई।
लैप्रोस्कोपिक सर्जरी का लाभ मरीज की रिकवरी में भी स्पष्ट दिखाई दिया। ऑपरेशन के करीब 24 घंटे के भीतर मरीज चलने-फिरने लगीं, जबकि दूसरे दिन उन्हें अस्पताल से छुट्टी के लिए फिट पाया गया। तेज रिकवरी ने न केवल आधुनिक तकनीक की उपयोगिता को रेखांकित किया, बल्कि जटिल सर्जरी को अपेक्षाकृत कम चीरे और कम असुविधा के साथ पूरा करने की चिकित्सकीय क्षमता को भी सामने रखा।
इस महत्वपूर्ण सर्जरी की सफलता में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष डॉ. रुचिरा नौटियाल के मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सर्जिकल टीम में डॉ. वंदना राजपूत, डॉ. अंजलि कौशिक तथा स्क्रब नर्स रोमा और ममता का सहयोग रहा। एनेस्थीसिया टीम ने भी पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
हिम्स जौलीग्रांट की यह उपलब्धि केवल आठ डर्मॉइड सिस्ट के सफल निष्कासन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस चिकित्सा दृष्टिकोण का उदाहरण है जिसमें आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञता और मरीज के भविष्य—तीनों को समान महत्व दिया जाता है। जटिल स्त्री रोग संबंधी मामलों में लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के क्षेत्र में यह सफलता संस्थान की बढ़ती विशेषज्ञता को भी रेखांकित करती है।

